दिल्ली धमाके के बाद यूपी के सहारनपुर निवासी 19 वर्षीय BDS छात्र हारिश अली को मुरादाबाद से ATS ने गिरफ्तार किया, जिस पर ISIS मॉड्यूल से जुड़कर ऑनलाइन कट्टरपंथ फैलाने और युवाओं को प्रभावित करने के आरोप हैं।
दिल्ली में हुए बम धमाके की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि एक और खबर ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम लोगों को भी चौंका दिया। इस बार मामला किसी आम संदिग्ध का नहीं, बल्कि एक मेडिकल छात्र का है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले 19 वर्षीय हारिश अली, जो मुरादाबाद के एक कॉलेज से BDS की पढ़ाई कर रहा था, उसे ATS ने
गिरफ्तार कर लिया है। अली पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था और भारत में चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने में सक्रिय था।
ATS की जांच में सामने आया है कि हारिश अली कथित रूप से एक पाकिस्तानी संचालक के संपर्क में था। वह VPN और फर्जी ID का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छुपाता था और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने की कोशिश करता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, हारिश ISIS से जुड़े वीडियो, भाषण और डिजिटल पत्रिकाएं शेयर करता था। इतना ही नहीं, बल्कि उसने "अल इत्तिहाद मीडिया फाउंडेशन" नाम से एक ऑनलाइन ग्रुप भी बनाया था, जिसका उद्देश्य भारत में ISIS की विचारधारा का प्रचार और नेटवर्क विस्तार करना बताया जा रहा है।
ATS को पहले से ही ऑनलाइन चरमपंथी गतिविधियों के इनपुट मिल रहे थे, जिसके बाद हारिश पर डिजिटल निगरानी रखी गई। तकनीकी साक्ष्य जुटाने के बाद उसे मुरादाबाद से रविवार के दिन गिरफ्तार किया गया और आरोपी के खिलाफ UAPA और भारतीय न्याय संहिता के तहत केस दर्ज किया गया है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि हारिश अली एक पढ़ा-लिखा छात्र है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि कैसे उच्च शिक्षा प्राप्त युवा भी ऑनलाइन कट्टरपंथ के जाल में फंस रहे हैं। यहाँ तक की छात्र के भाई-बहन भी डॉक्टर है और अली के पिता प्राइवेट कंपनी में काम करते है।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का आतंकवाद से जुड़ाव का एक लंबा इतिहास रहा है। यही कारण है कि यहां से समय-समय पर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी होती रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि ISIS जैसे आतंकी संगठन अब "हाई-प्रोफाइल" यानी शिक्षित और पेशेवर लोगों को निशाना बना रहे हैं। खासकर मेडिकल क्षेत्र से जुड़े युवाओं को तेजी से टारगेट किया जा रहा है।
हाल ही में सहारनपुर के एक अस्पताल में काम करने वाले डॉ. अदील की गिरफ्तारी ने इस
पैटर्न को और स्पष्ट किया था। दिल्ली ब्लास्ट - डॉ. अदील अहमद भी उसी इलाके में किराए के मकान में रहता था, जहां हारिश अली का पुश्तैनी घर है। इसके अलावा, पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से कई डॉक्टरों के आतंकी संगठनों से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार होने के मामले भी सामने आए हैं।
यह ट्रेंड सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती बनता जा रहा है, जहां पढ़े-लिखे और तकनीकी रूप से सक्षम लोग आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर करती है कि आतंकवाद अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए समाज के भीतर गहराई तक प्रवेश कर चुका है।
ऑनलाइन कट्टरपंथ और साइबर नेटवर्किंग के इस दौर में, केवल सुरक्षा एजेंसियों ही नहीं, बल्कि समाज, शिक्षण संस्थानों और परिवारों की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे ऐसे संकेतों को समय रहते पहचानें और रोकथाम करें।
रिपोर्ट
मोक्षी जैन
उपसंपादक, द नैरेटिव