मुंबई में धर्म पूछकर हमला, ‘जिहाद’ और ISIS से जुड़े नोट्स मिले; NIA जांच शुरूमुंबई में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सुरक्षाकर्मियों से पहले धर्म पूछा गया और कलमा पढ़ने का दबाव बनाया गया। इनकार करने पर उन पर चाकू और डंडे से हमला किया गया। जेब ज़ुबैर अंसारी के पास से ‘जिहाद’ और ISIS से जुड़े नोट्स मिलने के बाद मामले ..
विदेशी फंडिंग, ईसाई मिशनरी और अवैध कन्वर्जन (भाग 2): बस्तर में जनजातीय आस्था पर असर डाल रहा विदेशी नेटवर्कबस्तर में कन्वर्ज़न की बहस अब नए मोड़ पर है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में विदेशी फंडिंग और मिशनरी नेटवर्क के संभावित लिंक सामने आने के बाद सवाल और गहरे हो गए हैं। क्या यह केवल सामाजिक गतिविधि है या इसके पीछे एक संगठित “पैसे का रास्ता” काम कर रहा ..
माओवाद की बदलती रणनीति और शहरों में उभरता नया मॉडलभारत में सशस्त्र नक्सलवाद के अंत की घोषणा के बाद भी घटनाओं का एक नया पैटर्न सामने आ रहा है। रायगड़ा से नोएडा तक फैली घटनाएं संकेत देती हैं कि संघर्ष का स्वरूप बदल रहा है। क्या यह सिर्फ विरोध है या एक संगठित वैचारिक मॉडल?..
आरएसएस कार्यकर्ताओं पर बम हमला: कम्युनिस्ट नेताओं को 25 साल की सजाकन्नूर बम हमले मामले में अदालत के फैसले ने एक बार फिर राजनीतिक हिंसा पर बहस को तेज कर दिया है। CPI(M) से जुड़े दोषियों को 25 साल की सजा ने उन सवालों को सामने ला दिया है, जो लंबे समय से अनदेखे रहे। क्या हिंसा पर भी विचारधारा के आधार पर अलग-अलग नजरिया ..
माओवाद और चीन का "अदृश्य" कनेक्शनमाओवाद की वैचारिक जड़ें सीधे तौर पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी रही हैं। 1967 में नक्सलबाड़ी हिंसा के समय, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक माध्यमों ने इसे “वसंत की गर्जना” कहकर समर्थन दिया था।..
अमेरिका पर भारत की इस बड़ी जियोपॉलिटिकल जीत के बारे में आपने सुना क्या?यदि अमेरिकी विमानों को इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में स्वतंत्र पहुंच मिल जाती, तो यह संतुलन बदल सकता था। अमेरिका को इस क्षेत्र में एक स्थायी निगरानी क्षमता मिल जाती, जिससे भारत की विशिष्ट स्थिति कमजोर हो सकती थी। इसी संदर्भ में यह कहना अतिशयोक्ति ..
समाजवादी नहीं, नमाजवादी राजनीति : मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर "महिला आरक्षण" को रोकने में जुटे अखिलेश यादवमहिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक विधेयक पर सपा का विरोध नई बहस खड़ी कर रहा है। मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग के साथ उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि क्या यह सामाजिक न्याय की लड़ाई है या तुष्टिकरण की राजनीति।..
पुणे में ‘हिड़मा’ के नाम का जश्न: क्या माओवादी आतंक का सामान्यीकरण हो रहा है?पुणे के सरकारी छात्रावास में माओवादी आतंकी हिड़मा पर आधारित गीत और नृत्य ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था या हिंसक विचारधारा का सामान्यीकरण?..
लाल गलियारे का सच: रणनीति, विस्तार और पतन | भाग 4: राज्य की वापसी और बदलता समीकरणमाओवादी प्रभाव के लंबे दौर के बाद एक ऐसा समय आया जब राज्य ने अपनी रणनीति बदली और समन्वित कार्रवाई के साथ जमीनी स्तर पर उपस्थिति मजबूत की। सुरक्षा और विकास के संयुक्त प्रयासों ने कई क्षेत्रों में संतुलन बदल दिया।..
लाल गलियारे का सच: रणनीति, विस्तार और पतन | भाग 2: जब राज्य कमजोर पड़ा और हिंसा बढ़ीमाओवादी हिंसा का विस्तार केवल उनकी रणनीति का परिणाम नहीं था, बल्कि उस दौर की नीतिगत अस्पष्टता और कमजोर राज्य उपस्थिति का भी असर था। बस्तर से लेकर रेड कॉरिडोर तक, कई क्षेत्रों में समानांतर नियंत्रण स्थापित हुआ।..
क्या एक माओवादी को तेलंगाना का गौरव बनाना चाहती है कांग्रेस?क्या गद्दार जैसे माओवादी विचारधारा से जुड़े व्यक्ति को तेलंगाना का गौरव कहा जा सकता है? इस प्रतिक्रिया के बीच एक मूल प्रश्न दब गया कि क्या गद्दार की पहचान एक जनकवि की थी, या वह उससे कहीं अधिक विवादास्पद थी?..
जनजातीय पहचान पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या कर रहा वामपंथी मीडियासुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को लेकर जिस तरह की व्याख्या सामने आ रही है, उसने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या धर्म परिवर्तन के बाद भी जनजातीय पहचान वैसी ही रहती है?..
नक्सलवाद : कांग्रेस सरकार की नीतिगत विफलता और आज का बदलता भारतनक्सलवाद के दौर में भारत ने एक ऐसा समय देखा जब कई क्षेत्रों में राज्य की पकड़ कमजोर पड़ गई और समानांतर व्यवस्था उभर आई। यह समझना आवश्यक है कि कैसे UPA काल में रणनीति और कार्रवाई दोनों स्तरों पर चूक हुई, और कैसे आज समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद को ..
नेपाल में सत्ता नहीं, व्यवस्था बदली है!नेपाल के 2026 चुनावों ने केवल सरकार नहीं बदली, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दी है। युवाओं के नेतृत्व में उभरे इस बदलाव ने पारंपरिक दलों को किनारे कर दिया, लेकिन क्या यह स्थिरता ला पाएगा?..
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण कानून पर “भय” की राजनीति कौन कर रहा है?छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण कानून को लेकर खड़ा हुआ विवाद केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके चारों ओर गढ़े जा रहे भय और भ्रम के नैरेटिव को समझना भी जरूरी है। इस लेख में उन्हीं दावों की तथ्य आधारित पड़ताल की गई है, जो समाज में असमंजस और उत्तेजना ..
पश्चिम एशिया युद्ध में 15 दिन के बाद: नेतृत्व संकट, ऊर्जा अस्थिरता और बढ़ते तनाव के बीच भारत की संतुलित कूटनीतिमिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के पंद्रहवें दिन हालात और जटिल हो गए हैं। ईरान में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता खतरा और साइबर हमलों की आहट ने वैश्विक राजनीति को हिला दिया है। ऐसे समय में भारत ने संतुलित कूटनीति और राष्ट्रीय ..
शहरी नेटवर्क का नकाब: ‘Cover Organisations’ और माओवादी रणनीति की तीसरी परतमाओवादी दस्तावेज़ Urban Perspective में “Cover Organisations” की अवधारणा शहरी रणनीति की अहम कड़ी के रूप में सामने आती है। यह बताता है कि कैसे खुले जनसंगठनों और आंदोलनों के माध्यम से नैरेटिव, समर्थन और वैचारिक विस्तार की कोशिश की जाती है।..
कांग्रेस ने फिर पकड़ी अलग "धर्म कोड" की अलगाववादी राजनीति?मध्यप्रदेश में जनजातीय समाज के लिए अलग धर्म कोड की मांग ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। क्या यह सच में अधिकारों की रक्षा का सवाल है या पहचान के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति?..
महाराष्ट्र में कन्वर्जन नेक्सस पर लगाम की तैयारी, कड़े क़ानून का मसौदा तैयारमहाराष्ट्र सरकार ने जबरन और लालच देकर कराए जाने वाले कन्वर्जन पर लगाम लगाने के लिए ‘महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट 2026’ के मसौदे को मंजूरी दी है। प्रस्तावित कानून में सख्त सजा, प्रशासन को पूर्व सूचना और पुलिस जांच जैसे प्रावधान शामिल हैं।..
शीर्ष माओवादी कमांडर के अंतिम संस्कार से उजागर हुआ माओवादियों का अर्बन नेटवर्कतेलंगाना में एक शीर्ष माओवादी के अंतिम संस्कार में जुटी भीड़ अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच के दायरे में है। यह घटना केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि शहरों में फैले माओवादी अर्बन नेटवर्क की परतें खोलती नजर आ रही है।..
From Non Alignment to Multi Alignment: How Modi Is Reshaping India’s Global StrategyIndia’s foreign policy under Prime Minister Narendra Modi is increasingly being described as a new strategic framework. Moving beyond Cold War style bloc politics, New Delhi is pursuing multi alignment, balancing ties with major global powers while ..
अबूझमाड़ में बारूद से रंग तक का सफर: लाल आतंक से मुक्ति की ओर बस्तरदशकों तक नक्सल हिंसा के साए में रहने वाला अबूझमाड़ अब धीरे-धीरे बदलता दिखाई दे रहा है। अबूझमाड़ के भीतर इस वर्ष पहली बार ग्रामीणों ने खुले तौर पर होली मनाई। सुरक्षा अभियानों, नए कैंपों और विकास कार्यों के बीच बस्तर के इस दुर्गम इलाके में लौटती सामाजिक ..
बस्तर से सुप्रीम कोर्ट तक: जनजातियों के पेन-पुरखा की भूमि पर अनैतिक दावेदारी क्यों?सुप्रीम कोर्ट में चल रहा छत्तीसगढ़ का शव दफन मामला अब केवल धार्मिक स्वतंत्रता का प्रश्न नहीं रह गया है। जनजातीय समुदाय इसे पेन-पुरखा की भूमि पर अनैतिक दावेदारी और ग्राम स्वायत्तता की चुनौती के रूप में देख रहे हैं।..
शहरी घुसपैठ की रणनीति: ‘Fractional Work’ और माओवादी नेटवर्कUrban Perspective के “Fractional Work” में माओवादी शहरी रणनीति का वह पक्ष सामने आता है, जो संस्थाओं के भीतर रहकर प्रभाव बनाने की बात करता है। यह बताता है कि किस तरह जनसंगठनों के भीतर घुसपैठ कर दीर्घकालिक वैचारिक नियंत्रण स्थापित करने की योजना बनाई ..
किसान मुद्दे की आड़ में नई राजनीतिसंसद भवन में राहुल गांधी और विभिन्न किसान संगठनों की बैठक ने भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। क्या यह किसानों के हितों की वास्तविक चिंता है या व्यापक आंदोलन की राजनीतिक रणनीति?..
एक किताब, दो मोर्चे: जंगल और शहर के बीच माओवादी षड्यंत्रभारत में माओवादी हिंसा केवल जंगलों तक सीमित नहीं है। माओवादियों का अपना दस्तावेज Urban Perspective बताता है कि कैसे शहरों, विश्वविद्यालयों और लोकतांत्रिक मंचों का उपयोग वैचारिक युद्ध के लिए किया जाता है।..
राज्यसभा की मेज पर सांसद ने रखे कृत्रिम पैर और उजागर हुआ वामपंथी हिंसा का सचआज जब सदानंदन मास्टर संसद में खड़े हुए, या यूं कहें, खड़े न हो पाने की विवशता को शब्दों में ढालते हुए बोले, तो वह केवल अपना दर्द नहीं सुना रहे थे। वह केरल की उस वामपंथी राजनीति की सच्चाई को उजागर कर रहे थे, जहां हिंसा को “क्रांति” और हत्याओं को ..
बस्तर में टूटते "माओवादी जाल" की कहानीबस्तर में नक्सल संगठन अब अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है। हथियारबंद कैडर की घटती संख्या, आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाएं और सुरक्षा बलों की निरंतर घेराबंदी ने दशकों पुराने नेटवर्क को भीतर से हिला दिया है।..
मरीचझांपी: वामपंथी शासन में हुआ वह नरसंहार जिस पर सभी ने चुप्पी साध ली!मरीचझापी 1979 स्वतंत्र भारत के इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसे दशकों तक दबाया गया। सुंदरबन के एक निर्जन द्वीप पर बसे हजारों हिंदू शरणार्थियों पर वामपंथी सरकार द्वारा की गई घेराबंदी, भूख, हिंसा और हत्या की यह कहानी आज भी न्याय और जवाबदेही के प्रश्न ..
आमाबेड़ा के सवाल: अवैध दफन, संगठित भीड़, सुनियोजित हिंसा और सिस्टम की भूमिका!कांकेर के आमाबेड़ा क्षेत्र में एक अवैध शव दफन से शुरू हुआ विवाद जल्द ही संगठित हिंसा, बाहरी दखल और प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर सवालों में बदल गया। इस घटना में जनजातीय परंपरा का उल्लंघन, भीम आर्मी की संदिग्ध भूमिका, मिशनरी गतिविधियां और सिस्टम की मिलीभगत ..
Manufacturing Victimhood: How Newslaundry Sanitises Maoist Networks and Whitewashes the ‘Urban Naxal’ EcosystemThis report dismantles the carefully curated victim narrative built around Anand Teltumbde by sections of the media. By placing judicial records, investigative findings, and ideological networks back into the frame, it exposes how Maoist urban support ..
Madhya Pradesh Declares Victory Over Armed Maoism, But the Lessons Remain StarkThe three-decade-long Naxalite crisis in Madhya Pradesh has finally come to an end. Following the surrender of two notorious Maoist commanders in Balaghat, the state declared itself "Naxal-free." This achievement marks not only a victory for the ..
बस्तर के विरुद्ध 'द वायर' का माओवादी प्रोपेगेंडा'द वायर' की हालिया रिपोर्ट बस्तर को एक ऐसे वैचारिक फ्रेम में प्रस्तुत करती है, जो माओवादी हिंसा को ऐतिहासिक ‘प्रतिरोध’ की परंपरा में ढाल देता है। बस्तर की जमीनी सच्चाई विरुद्ध वामपंथी मीडिया की वैचारिक कहानी, यह टकराव समझना अब ज़रूरी है।..
विदेशी फंडिंग कैसे बदल रही है भारत की जनजातीय जनसांख्यिकीभारत के जनजातीय क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव के पीछे विदेशी फंडिंग, शेल NGOs और डिजिटल प्रचार की एक संगठित श्रृंखला काम कर रही है। रिलीजियस नेटवर्क किस तरह विकास योजनाओं की आड़ में वैचारिक पकड़ बढ़ाते हैं और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित ..
Unmasking the Propaganda: The Koregaon Bhima Case as a Vital Stand for India's SovereigntyNew revelations prove that the “evidence planted by malware” narrative in the Bhima Koregaon case is crumbling. NIA stands firm: incriminating letters are real, not fabricated. Behind the Western forensic reports lies a deeper attempt to weaken ..
हिड़मा के पक्ष में खड़े लोग भारतीय लोकतंत्र के विरुद्ध खड़े हैंमाड़वी हिड़मा की मौत ने न केवल लाल आतंक की जड़ें हिलाईं, बल्कि उन शहरी नक्सली समूहों और राजनीतिक तत्वों को भी बेनकाब कर दिया जो एक खूनी आतंकी को ‘नायक’ साबित करने में लगे थे। हिड़मा का महिमामंडन वास्तव में भारत के लोकतंत्र और सुरक्षा तंत्र के खिलाफ ..
Debunking the BBC’s Doom: India’s Gen Z is Building, Not BurningThe BBC’s narrative of a rebellious, fragmented Indian Gen Z is a distortion of reality. Far from fueling unrest, India’s 370 million youth are driving innovation, powering startups, and strengthening a vibrant democracy...
दंड नीति (भाग - 3) : अंतिम मोर्चा - जंगल से जनगण तकनक्सलवाद की आख़िरी दीवारें ढह चुकी हैं। बीजापुर से गढ़चिरौली तक अब बंदूक की जगह भरोसा और विकास बोल रहा है। भारत सरकार की "दंड नीति” ने जंगलों में राज्य की उपस्थिति को जनसहभागिता में बदल दिया है। यह केवल एक सुरक्षा रणनीति की जीत नहीं, विचारधारा के ..
भारत-तालिबान संबंधों का विरोध: लिबरल समूह क्यों कर रहे विलाप?भारत-तालिबान संबंधों पर कम्युनिस्ट और लिबरल समूहों का विरोध रणनीतिक हितों को नजरअंदाज कर रहा है। पाकिस्तान-चीन नेटवर्क को काउंटर करने के लिए यह कदम आवश्यक है।..
बस्तर में नक्सली हिंसा: विचारधारा का खोखलापन और निर्दोषों का रक्तबस्तर एक बार फिर नक्सली खूनखराबे से दहला है। बीजापुर और सुकमा जिलों में एक ही रात हुई दो हत्याओं ने जनजातीय समाज की पीड़ा को फिर उजागर कर दिया। माओवादी, जो खुद को जनता का रक्षक बताते हैं, वास्तव में निर्दोष ग्रामीणों के सबसे बड़े हत्यारे हैं।..
ग्राउंड रिपोर्ट : सलवा जुडूम पर प्रतिबंध का बचाव करने वाले न्यायाधीशों को बस्तर की पुकार — जज साहब, कभी हमारी पीड़ा भी देखिएबस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों से एक दर्दनाक पुकार, यह खुला पत्र उन न्यायाधीशों के नाम है जिन्होंने सलवा जुडूम पर प्रतिबंध का समर्थन किया। ग्रामीण बताते हैं कि प्रतिबंध के बाद कैसे स्कूल जले, सड़कें टूटीं, दवाई और राशन नहीं पहुँचे, और पहुँचा सिर्फ ..
ईसाई पादरियों के 'यौन चंगुल' में दुनिया भर की ननेंईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्म गुरु पोप फ्रांसिस ने वर्ष 2019 में मध्य-पूर्व के अपने ऐतिहासिक दौरे के दौरान पत्रकारों से वार्ता में इस बात को स्वीकार किया था कि चर्चों के भीतर पादरियों द्वारा ननों का यौन शोषण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि ..
चीन - एक सप्ताह में कोरोना से 13 हजार लोगों की मौत, अब तक 110 करोड़ लोग हो चुके संक्रमितकोरोना महामारी के कारण चीन में तबाही मची हुई है। चीनी नववर्ष के अवसर पर एक तरफ जहां लोग महामारी की चपेट में आकर मर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 3 वर्षों के सख्त प्रतिबंधों से आजाद हुए लोग बाहर सड़कों में उतरकर जश्न मना रहे हैं।..
ईसाई आतंक के विरुद्ध बस्तर के बाद अब सरगुजा के जनजातियों में भी आक्रोश, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापनबस्तर के नारायणपुर में ईसाइयों के द्वारा जनजातीय समाज पर किए गए जानलेवा हमले का आक्रोश अब छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से में भी फैल गया है। जनजाति बाहुल्य जिला सरगुजा में इस घटना को लेकर वनवासी समाज के भीतर अत्यंत आक्रोश देखा जा रहा है।..
मई दिवस: मजदूरों के नाम पर कम्युनिस्ट प्रोपेगेंडा का वार्षिक मंच?मई दिवस को दुनिया भर में मजदूरों के अधिकारों के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसका इतिहास कई परतों में बंटा हुआ है। शिकागो के हेमार्केट से लेकर सोवियत परेड और भारत के नक्सल आतंक तक, यह दिन केवल श्रमिक संघर्ष नहीं, बल्कि वैचारिक विमर्श का ..
नक्सलवाद पर कब थमेगा वामपंथियों का प्रोपेगेंडा ?नक्सलवाद पर चल रही बहस में एक बड़ा सवाल उभरता है कि वामपंथी मीडिया हमेशा एक पक्ष ही क्यों दिखाता है? बस्तर की जमीन पर मौजूद वास्तविकता और नंदिनी सुंदर जैसे वामपंथियों के लेखों में प्रस्तुत नैरेटिव के बीच गहरा अंतर दिखाई देता है। पढ़िए क्या है पूरी ..
विदेशी फंडिंग, ईसाई मिशनरी और अवैध कन्वर्जन (भाग 1): उत्तर छत्तीसगढ़ में गांव के गांव बन गए ईसाईउत्तर छत्तीसगढ़ के जशपुर और बस्तर क्षेत्रों में गांव-स्तर पर हो रहे धर्मांतरण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह केवल आस्था का बदलाव है या इसके पीछे विदेशी फंडिंग और संगठित नेटवर्क की भूमिका है? इस शृंखला के पहले भाग में जमीनी स्तर पर बदलती ..
KMT की बीजिंग यात्रा का क्या अर्थ है?ताइवान की राजनीति में KMT की हालिया बीजिंग यात्रा ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह केवल राजनीतिक संवाद है या चीन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा? इस घटनाक्रम ने न केवल ताइवान के भीतर संतुलन बदला है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति समीकरणों ..
लाल गलियारे का सच: रणनीति, विस्तार और पतन | अंतिम भाग: सशस्त्र माओवाद का अंत!बीते दो वर्षों में माओवादी हिंसा और उसके सशस्त्र ढांचे में आई गिरावट ने “लाल गलियारे” की पूरी कहानी बदल दी है। सुरक्षा अभियानों, आत्मसमर्पण और जमीनी स्तर पर बढ़ती प्रशासनिक पहुंच के बीच यह सवाल अब निर्णायक हो गया है कि क्या सशस्त्र माओवाद वास्तव ..
चीन पर चुप्पी, भारत पर सवाल: अरुणाचल की सियांग परियोजना पर 'प्रोपेगेंडा' का खेल?अरुणाचल की सियांग परियोजना को लेकर सामने आई रिपोर्ट कई सवाल खड़े करती है। क्या यह वास्तव में जनजातीय विरोध की पूरी तस्वीर है या एक चयनित नैरेटिव? चीन के मेगा डैम, राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के पहलुओं को नजरअंदाज कर क्या एकतरफा कहानी गढ़ी जा रही ..
छत्तीसगढ़ धर्मांतरण कानून: पत्रकारों के सवालों से भागे पन्नालाल? विवादित क्रिश्चियन लीडर द्वारा "अराजकता" फैलाने की कोशिश!रायपुर में धर्मांतरण कानून को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवादित ईसाई लीडर अरुण पन्नालाल गंभीर सवालों के घेरे में आ गए। पत्रकारों से टकराव, महिला पत्रकार पर विवादित टिप्पणी और पहले से लगे अंदरूनी आरोपों ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है। ..
अबूझमाड़ की कहानी: सुरक्षा के बाद विकास, पहली बार घरों तक पहुँचा पानीअबूझमाड़ के दूरस्थ नेलंगुर गांव में दशकों से पानी के लिए संघर्ष करने वाले ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। जल जीवन मिशन के तहत पहली बार घरों तक नल से पानी पहुंचा है। यह बदलाव केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा के बाद विकास की उस प्रक्रिया का ..
लाल गलियारे का सच: रणनीति, विस्तार और पतन | भाग 3: जंगल से शहर तक का नेटवर्कमाओवादी हिंसा केवल जंगलों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसका एक जटिल शहरी नेटवर्क भी सक्रिय था, जो इसे वैचारिक, संसाधनात्मक और संरचनात्मक समर्थन देता था। यह समझना आवश्यक है कि कैसे शहरों में विकसित यह नेटवर्क पूरे संघर्ष को व्यापक स्वरूप देता रहा।..
From Maoist Links to “State Pride”: What Is Congress Defending?Can a figure linked to Maoist ideology be celebrated as a symbol of regional pride? The controversy surrounding Gaddar raises deeper questions about political narratives, selective memory, and ideological positioning. As Congress defends its stance, ..
अरुणाचल का सच: 2011 में कैसे ‘कन्वर्ज़न नेटवर्क’ ने जकड़ी जड़ें और आज कैसे बदल रही है तस्वीरअरुणाचल प्रदेश में 2011 के दौर में कन्वर्ज़न से जुड़ी गतिविधियों और प्रशासनिक निष्क्रियता ने गंभीर सामाजिक-सांस्कृतिक संकट पैदा किया। एक दशक बाद, 2026 में कानून, न्यायिक हस्तक्षेप और जनजातीय चेतना के चलते स्थिति बदलती दिख रही है।..
जब भीतर से कमजोर हो रहा था भारत: कांग्रेस दौर में आंतरिक सुरक्षा की सच्चाईUPA शासनकाल के दौरान भारत की आंतरिक सुरक्षा किन चुनौतियों से घिरी थी, यह सवाल आज भी प्रासंगिक है। नक्सलवाद का विस्तार, आतंकवादी हमले और नीतिगत कमजोरियां उस दौर की बड़ी वास्तविकताएं थीं।..
द प्रिंट का प्रोपेगेंडा : भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं पर झूठे नैरेटिव गढ़ने की राजनीतिक्या भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं वास्तव में कमजोर हो रही हैं या यह केवल एक गढ़ा गया नैरेटिव है? मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर उठे विवाद के बहाने संस्थाओं पर बढ़ते अविश्वास और चयनात्मक आलोचना की सच्चाई क्या है?..
लाल गलियारे का सच: रणनीति, विस्तार और पतन | भाग 1: यह आंदोलन नहीं, एक रणनीति थीमाओवादी हिंसा को अक्सर एक आंदोलन के रूप में देखा गया, लेकिन इसकी वास्तविकता एक सुनियोजित रणनीति में छिपी थी। विदेशी विचारधारा से प्रेरित इस मॉडल ने भारत के कई हिस्सों में राज्य की उपस्थिति को चुनौती दी।..
छत्तीसगढ़: जनजातीय अस्मिता की सुरक्षा का कानून पास, कांग्रेस का विरोध में ‘पलायन’छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित होने के साथ राज्य में अवैध धर्मांतरण पर सख्त नियंत्रण का रास्ता खुल गया है। जनजातीय अस्मिता और सामाजिक संतुलन की रक्षा को लेकर लाया गया यह कानून अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है, जहां ..
रूस के तेल पर अमेरिका का यू टर्न: भारत की संतुलित विदेश नीति के सामने झुकी वैश्विक रणनीतिरूस के तेल को लेकर लंबे समय तक भारत पर दबाव बनाने वाले अमेरिका ने अब अपना रुख बदल लिया है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की रिफाइनिंग क्षमता और संतुलित विदेश नीति ने उसे एक अहम शक्ति बना दिया है। यह बताता है कि कैसे भारत ने दबावों के बावजूद अपनी ..
माओवादी आतंक की सच्चाई बनाम The Print का प्रोपेगेंडाद प्रिंट में प्रकाशित वीर भारत तलवार के लेख ने जनजातीय प्रश्न और नक्सलवाद को लेकर एक पुराना वैचारिक नैरेटिव दोहराया। लेकिन क्या यह पूरा सच है?..
बस्तर का गाँव बना जल संरक्षण का मॉडलबस्तर के बास्तानार ब्लॉक का तिरथुम गांव कभी पानी की भारी कमी से जूझता था। पथरीली पहाड़ियों से बारिश का पानी बह जाता था। ग्रामीणों ने 900 कंटूर ट्रेंच बनाकर इस समस्या का समाधान किया। आज भूजल स्तर बढ़ चुका है और किसान एक की जगह तीन फसल ले रहे हैं। ..
क्या उत्तर छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा है “लैंड जिहाद” का नेटवर्क?छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में विशेष संरक्षित जनजाति पंडो की जमीन पर मुस्लिमों द्वारा अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद प्रशासन ने धारा 170 बी के तहत जांच शुरू कर नोटिस जारी किया है।..
दुनिया को सेक्युलरिज्म का ज्ञान देने वाले अमेरिका का सच: अब "रिलीजियस वॉर" की नौटंकी पर उतरे ट्रंपईरान युद्ध के बीच ओवल ऑफिस में हुई एक ईसाई प्रार्थना सभा ने अमेरिका की सेक्यूलर छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप के लिए की गई प्रार्थनाओं और अमेरिकी सेना में युद्ध को “दैवीय मिशन” बताने के आरोपों ने एक नई बहस छेड़ दी है।..
पेन-पुरखा की भूमि पर "क्रॉस" का अतिक्रमण: बस्तर में आगे क्या होगा?बस्तर के जनजातीय क्षेत्रों में शव दफन को लेकर उठा विवाद अब एक बड़े सवाल में बदल गया है। पेन-पुरखा की पवित्र भूमि, ग्राम सभा के अधिकार और विदेशी रिलीजियस कल्चर के विस्तार को लेकर समाज में नई बहस शुरू हो गई है। आखिर जनजातीय परंपरा और बाहरी धार्मिक ..
खामेनेई की मौत के बाद अब आगे क्या होगा?उत्तराधिकार की दौड़ तेज, आईआरजीसी की भूमिका अहम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर वैश्विक नजरें।..
प्रधानमंत्री मोदी की बौद्ध कूटनीति: 'भगवान बुद्ध की भूमि' का नारा दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की बढ़त रोकने का मजबूत कदमप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भारत को "भगवान बुद्ध की भूमि" बताकर एक मजबूत भू-राजनीतिक संदेश दिया। यह बयान केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की बढ़ती सांस्कृतिक और आर्थिक पहुंच को संतुलित ..
पास्टर-पादरी के "एंट्री बैन" से मिशनरी नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा?कांकेर में ग्रामसभाओं द्वारा लगाए गए होर्डिंग्स पर उठा विवाद आखिरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा! अदालतों ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता और ग्रामसभा के सांस्कृतिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे साधा जाएगा। क्या यह ‘एंट्री बैन’ था या कानून ..
विचारधारा की कसौटी: कम्युनिज़्म की नीतियाँ और उनके परिणामसोवियत संघ, चीन और क्यूबा के उदाहरणों से कम्युनिस्ट नीतियों की वास्तविक कीमत का विश्लेषण।..
इनसाइड स्टोरी: तीन दिन का ऑपरेशन, सात माओवादी ढेर और गढ़चिरौली में टूटा माओवादी तंत्रगढ़चिरौली के जंगलों में तीन दिनों तक चला यह एंटी-माओवादी ऑपरेशन केवल एक मुठभेड़ नहीं था, बल्कि माओवादी तंत्र पर सीधा और निर्णायक प्रहार था। सात माओवादियों के मारे जाने और टॉप लीडर के ढेर होने से इलाके में सक्रिय नेटवर्क को गहरी चोट पहुंची है।..
गांधी के अंतिम संस्कार पर पश्चिमी मोह : नेहरू की सोच, संघ की भूमिका और इतिहास का दबाया गया सचमहात्मा गांधी की हत्या के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर सत्ता के शीर्ष पर गहरी वैचारिक खींचतान चली। जहां जवाहरलाल नेहरू पश्चिमी दृष्टिकोण से प्रेरित अंतिम संस्कार चाहते थे, वहीं एम सी शर्मा ने भारतीय परंपरा के अनुरूप चिता और दाह संस्कार सुनिश्चित ..
धर्मांतरण ही राष्ट्रांतरण है - महात्मा गांधीधर्मांतरण पर महात्मा गांधी के विचार आज की बहस में फिर से प्रासंगिक हो गए हैं। गांधी स्पष्ट रूप से मानते थे कि धर्म व्यक्ति का निजी विषय है और किसी भी प्रकार का प्रलोभन या दबाव अनैतिक है।..
कांकेर में ‘जन-संवाद’ के नाम पर जनजातीय अस्मिता पर हमला? : अमित जोगी के दौरे की पूरी कहानीकांकेर में अमित जोगी की प्रस्तावित “जन-संवाद बैठक” अब गंभीर सवालों के घेरे में है। आमाबेड़ा-बड़े तेवड़ा घटना, अवैध शव दफन, हिंसा और पांचवीं अनुसूची के नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बीच यह कार्यक्रम ‘पीड़ितों की आवाज़’ नहीं, बल्कि नैरेटिव की राजनीति ..
तेल, सत्ता और तख्तापलट: वेनेजुएला में अमेरिकी दखल के मायने?वेनेजुएला संकट केवल एक देश की राजनीतिक उथल-पुथल नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का आईना है। यह कहानी सिर्फ वेनेजुएला की नहीं, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था की सच्चाई है।..
केरल में कम्युनिस्ट विचारधारा की दरारेंतिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा की जीत ने केरल की राजनीति में लंबे समय से जमी कम्युनिस्ट विचारधारा की नींव को हिला दिया है। यह परिणाम सिर्फ एक स्थानीय चुनावी बदलाव नहीं, बल्कि वाम राजनीति की वैचारिक थकान, भ्रष्टाचार के आरोपों और सामाजिक असंतोष का ..
The Narrative Investigation - Exposing the “Green Mafia”: How Maoist and Conversion Networks Hijack India’s Environmental MovementsThis investigation uncovers how Maoist fronts, conversion-linked networks, and urban activist groups are reshaping India’s environmental movements from within. Using deep-dive case studies from Bailadila, Niyamgiri, and Hasdeo Arand, the report ..
अंदरूनी पड़ताल: शहरों में कैसे पनप रहा है माओवादी ‘यूनाइटेड फ्रंट’ मॉडलमाओवादी नेतृत्व के कमजोर होने के बाद शहरों में सक्रिय ओवरग्राउंड नेटवर्क नई रणनीति के रूप में उभर रहे हैं। डिजिटल एक्टिविज़्म, एनजीओ, शिक्षण संस्थानों और कानूनी प्लेटफॉर्म के सहारे बन रहे ये गठजोड़, सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती साबित हो रहे ..
ग्राउंड रिपोर्ट : 25 साल, हजारों मौतें, अंतत: PLGA पतन की ओरपिछले 25 वर्षों में PLGA ने देश के सबसे खूनी हमलों को अंजाम दिया, लेकिन 2025 आते-आते यह हिंसक संगठन अब ढहने की कगार पर है। दंतेवाड़ा से लेकर दोरनापाल तक फैले नरसंहारों की यह ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि कैसे जनता का मोहभंग, सुरक्षा बलों की रणनीति ..
सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रहा है #CongressNaxalNexus? : सोनिया गांधी, NAC और नक्सलवाद के कथित संबंधों की परतेंआज X पर #CongressNaxalNexus ट्रेंड कर रहा है। यह कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी के NAC ने नक्सलवाद को बढ़ावा देकर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया। दंतेवाड़ा नरसंहार से झीरम घाटी हमले तक, NAC की नक्सल समर्थक नीतियों ने हजारों जिंदगियां लीं। क्या सचमुच ..
नैरेटिव एक्सक्लुसिव : दीपावली के दौरान नल्लामल्ला के जंगलों में हुई माओवादियों की गुप्त बैठक की इनसाइड स्टोरीतेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित नल्लामल्ला जंगल में माओवादी नेताओं की गुप्त बैठक ने संगठन की कमजोर होती पकड़ और नेतृत्व संकट को उजागर किया। देवजी, हिड़मा और देवा जैसे बचे हुए नेता संगठन को पुनर्गठित करने की योजना बना रहे हैं।..
सरेंडर रणनीति : बस्तर के जंगलों में माओवाद की बदलती चालबस्तर के जंगलों में बंदूकें झुक गई हैं, लेकिन विचार अब भी खड़ा है। आत्मसमर्पण की इन तस्वीरों के पीछे एक नई रणनीति जन्म ले रही है, जहां माओवादी अब संविधान की भाषा में संघर्ष करने की तैयारी कर रहे हैं। क्या यह शांति का आरंभ है या एक और वैचारिक जंग ..
दंड नीति (भाग - 2) : रणनीति का पुनर्गठन - बंदूक से विकास तकभारत की नक्सल नीति अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रही। यह विकास और पुनर्वास की नई परिभाषा बन गई है। ऑपरेशन से लेकर आत्मसमर्पण नीति तक, सरकार की दंड नीति ने जंगलों में बंदूक की जगह भरोसे और विकास की रोशनी फैला दी है।..
नोबेल का नया चेहरा या वॉशिंगटन की पुरानी पटकथा? : अमेरिका के "लोकतंत्र" एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट की नई नायिका "मारिया कोरीना माचाडो"2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो को मिला, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी कहीं अधिक गहरी है। NED फंडिंग, अमेरिकी दखल और ‘लोकतंत्र’ के नाम पर सत्ता परिवर्तन की वैश्विक रणनीति।..
द नैरेटिव एक्सक्लूसिव रिपोर्ट : सोनम वांगचुक का 'डीप स्टेट' कनेक्शनमीडिया में फैलाए प्रोपेगेंडा के अनुसार सोनम वांगचुक एक इंजीनियर, इनोवेटर और शिक्षाविद हैं, और साथ ही क्लाइमेट को लेकर एक जागरूक एक्टिविस्ट हैं। गौरतलब है कि सोनम वांगचुक एक ऐसे परिवार से आते हैं जो लद्दाख का समृद्ध एवं प्रभावशाली परिवार रहा है। ..
5 मई: कार्ल मार्क्स का जन्मदिन, जिसके विचार ने पूरे विश्व में 10 करोड़ से अधिक लोगों की जान ले लीआज 5 मई को वैश्विक इतिहास के सबसे बुरे और क्रूरतम विचार को रखने वाले इंसानों में से एक कार्ल मार्क्स का जन्मदिन है। कार्ल मार्क्स के विचार की वजह से बीते एक सदी में विश्व में 10 करोड़ से अधिक लोगों की हत्या की गई। इन हत्याओं से कार्ल मार्क्स के ..
अर्बन नक्सल : क्या है और कैसे कार्य करता है ?माओवादियों के शहरी मायाजाल की असली रूपरेखा 2004 में तैयार की गई थी। भारत में नक्सल हिंसा की शुरुआत के बाद 80 के दशक से ही बौद्धिक क्षेत्र में नक्सलवाद ने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। शिक्षण संस्थानों से लेकर सामाजिक और प्रभावशाली संस्थाओं पर कब्जा ..
नारायणपुर : पुलिसिया कार्रवाई के विरुद्ध आक्रोशित जनजाति ग्रामीणों के धरने से डरा प्रशासन, निर्दोषों पर कार्रवाई नहीं करने का दिया आश्वासनबस्तर के नारायणपुर जिले में धर्मान्तरित ईसाइयों के द्वारा स्थानीय जनजातीय ग्रामीणों के साथ की गई हिंसा से पूरे छत्तीसगढ़ में जनजाति समाज के भीतर आक्रोश है।..
सोमालिया में आधुनिक शिक्षा का विरोध करते हुए इस्लामिक आतंकियों ने किया बड़ा हमला, 120 की मौत; 300 से अधिक घायलसोमालिया में आधुनिक शिक्षा का विरोध करते हुए इस्लामिक आतंकियों ने किया बड़ा हमला, 120 की मौत; 300 से अधिक घायल..